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इंसानियत पहले, राजनीति बाद में: घायल नीलगाय के इलाज के लिए रुके बसपा नेता जयप्रकाश मौर्य

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Bureau Report

*इंसानियत पहले, राजनीति बाद में: घायल नीलगाय के इलाज के लिए रुके बसपा नेता जयप्रकाश मौर्य*

प्रिंस शर्मा संवाददाता}
आलापुर अंबेडकर नगर। (आशा भारती नेटवर्क) माडरमऊ जहांगीरगंज
रामकोला जाते समय जहांगीरगंज–माडरमऊ मुख्य मार्ग पर एक संवेदनशील तस्वीर देखने को मिली, जब जयप्रकाश मौर्य ने घायल नीलगाय को सड़क किनारे तड़पता देखा और तत्काल अपना काफिला रुकवा दिया।जानकारी के अनुसार, जयप्रकाश मौर्य रामकोला में रामदास के निधन की सूचना पर शोक संवेदना व्यक्त करने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर मुख्य मार्ग पर घायल अवस्था में पड़ी नीलगाय पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए वाहन से उतरकर हालात का जायजा लिया और आसपास मौजूद लोगों से सहयोग की अपील की।संयोगवश उसी समय वहां से गुजर रहे समाजसेवी डॉ. एस.पी. चक्रवर्ती, आदर्श मानव समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष घनश्याम तथा पत्रकार रमेश मौर्य भी रुक गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार रमेश मौर्य ने तत्काल वन क्षेत्राधिकारी शैलेश यादव को फोन कर सूचना दी।सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। वन दरोगा सीतांशु श्रीवास्तव, वाचर अनुराग पाण्डेय, प्रमोद यादव तथा मोबाइल वेटनरी यूनिट के प्रभारी डॉ. दिलीप अपनी टीम—रोहित मौर्य (MTS) एवं अंगद पासवान—के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने घायल नीलगाय का प्राथमिक उपचार किया और आवश्यक दवाएं दीं।वन क्षेत्राधिकारी शैलेश यादव ने बताया कि नीलगाय की हालत को देखते हुए उसे बेहतर देखभाल और उपचार के लिए स्थानीय पौधशाला तेंदूआईकला भेजा जाएगा, जहां चिकित्सकीय निगरानी में उसका इलाज किया जाएगा।गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी के नेता जयप्रकाश मौर्य रामनगर पूर्वी क्षेत्र से सदस्य जिला पंचायत के भावी प्रत्याशी हैं और क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों को लेकर सक्रिय रहते हैं।
मौके पर मौजूद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा,
“मैं नेता होने से पहले एक इंसान हूं। मानवता हमें सिखाती है कि यदि कहीं कोई घायल व्यक्ति या पशु दिखे तो उसकी मदद करना हमारा पहला कर्तव्य है। पशु अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी सहायता करना हमारी और भी बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। मैं समाज के सभी लोगों से अपील करता हूं कि अवसर मिलने पर सेवा कार्य जरूर करें।”
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। जयप्रकाश मौर्य के इस मानवीय कदम से यह साबित हुआ कि जनप्रतिनिधि यदि संवेदनशील हों तो समाज में करुणा और जिम्मेदारी की भावना और मजबूत होती है।

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