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गिरजा शंकर गुप्ता
अंबेडकर नगर। (आशा भारती नेटवर्क) विकासखंड कटेहरी क्षेत्र के मंशापुर गांव में गाटा संख्या 145 पर बना तालाब इन दिनों सुर्खियों में है। वर्ष 2023 में स्थानीय ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और चंदा एकत्रित कर इस तालाब का निर्माण कराया था। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब को उनके अपने प्रयासों से संरक्षित किया गया और यह गांव के लिए जीवन रेखा साबित हुआ। लेकिन अब उसी तालाब को प्रशासन द्वारा अमृत सरोवर योजना में शामिल कर काम कराए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।
शिकायत पर मिली धमकी का आरोप
दो दिन पूर्व ग्रामीणों ने इस कार्य को लेकर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को शिकायत भेजी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बाद जिलाधिकारी के समीप बैठे एक जिम्मेदार अधिकारी ने उसे धमकी दी। ग्रामीणों का कहना है कि “जांच और कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वालों को डराया जा रहा है।”
अधिकारियों से संवाद की नाकाम कोशिश
मामले को लेकर जब जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से सीधे संपर्क का प्रयास किया गया तो उनका फोन ‘पहुंच से बाहर’ बताया गया। इसके बाद खंड विकास अधिकारी कटेहरी हौसला प्रसाद से संपर्क किया गया तो उन्होंने सफाई दी कि “तालाब की खुदाई नहीं हो रही है, केवल समापन का काम किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी ने भी निरीक्षण किया था।” हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना पूरी बात सुने ही खंड विकास अधिकारी हौसला प्रसाद ने फोन काट दिया।
इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनके परिचारक ने बताया कि “साहब बैठक में हैं।” परिचारक ने जिला विकास अधिकारी से बात करने की सलाह दी, किंतु उनका फोन भी उपलब्ध नहीं हो सका।
अपर जिलाधिकारी और तहसीलदार का पक्ष
शिकायतकर्ता ने जब मामले को लेकर अपर जिलाधिकारी से संपर्क साधा तो उन्होंने कहा कि “आप तहसीलदार से जाकर मिल लीजिए, वह आपको पूरा विवरण दे देंगे।” यह जवाब सुनकर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी मामले को समझते भी हैं या केवल कोरम पूरा कर रहे हैं?
इसके बाद तहसीलदार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “यह मामला कब्जे से संबंधित नहीं है, कृपया आप खंड विकास अधिकारी कटेहरी से ही संपर्क कीजिए।” इस तरह जिम्मेदारी एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी पर टाली जाती रही, जबकि विवादित कार्य लगातार प्रगति पर है।
ग्रामीणों की नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि यह तालाब उनकी मेहनत और सहयोग से बना था, लेकिन प्रशासन अब बिना किसी परामर्श और पूर्व जानकारी के इसे सरकारी योजना में दिखाकर श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि तालाब की मौजूदा हालत में किसी बड़े कार्य की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद अमृत सरोवर के नाम पर कार्य करवाना भ्रष्टाचार और खानापूर्ति की ओर इशारा करता है।
कार्रवाई की बजाय काम तेज़
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां इस शिकायत की जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए थी, वहां उल्टे कार्य और तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यही कारण है कि अब ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि “क्या अधिकारी केवल दिखावा कर रहे हैं या वास्तव में लापरवाह हो गए हैं?”
खंड विकास अधिकारी कटेहरी पर मनमानी का आरोप
कटेहरी विकासखंड के खंड विकास अधिकारी हौसला प्रसाद पर ग्रामीणों ने मनमानी करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि न तो ग्रामीणों की बात सुनी जा रही है और न ही शिकायतों का संज्ञान लिया जा रहा है। ऊपर से धमकी मिलने की बात ने ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
नंबर एक बनने का दावा या खोखला सपना..?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर शिकायतकर्ताओं को धमकाया जाएगा, अधिकारियों से संपर्क साधना असंभव होगा और कार्यवाही के बजाय विवादित काम तेज़ी से कराए जाएंगे, तो आखिर कैसे अम्बेडकर नगर प्रदेश में नंबर एक बन पाएगा?
ग्रामीण अब उच्चाधिकारियों और शासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर चंदे से बना तालाब सरकारी श्रेय की राजनीति का शिकार क्यों बन रहा है।
जिम्मेदारों की लापरवाही पर उठे सवाल
जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों की इस लापरवाही ने न केवल स्थानीय जनता का विश्वास डगमगाया है, बल्कि शासन की योजनाओं पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही रवैया जारी रहा तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख पर भी आँच आएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किरकिरी कराने में पीछे नहीं हट रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी।