- एडमिशन से लेकर ड्रेस-किताब-फीस तक सब मनमाना – शिक्षा को बना दिया है शुद्ध व्यवसाय, शिक्षा विभाग और अधिकारी खुलेआम सोए हुए
अंबेडकर नगर। (आशा भारती नेटवर्क) ज़िले के प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा को नफे का सबसे बड़ा धंधा बना लिया है। एडमिशन, यूनिफॉर्म, किताबें और फीस – हर चीज पर मनमानी चल रही है। अभिभावक रो-रोकर थक गए, लेकिन शिक्षा विभाग, डीईओ और जिला प्रशासन की लापरवाही देखकर लगता है कि वे भी इस लूट में साझेदार बन चुके हैं। आरटीई एक्ट, फीस रेगुलेशन और हर नियम कागजों में सिमट गए हैं। स्कूल मालिक खुले आम कह रहे हैं – “हमारी मर्जी, सरकार कुछ नहीं कर सकती!”स्कूलों ने शिक्षा को कैसे बना दिया है शुद्ध व्यापार?मेरिट, आरटीई कोटा या किसी नियम का नामोनिशान नहीं।रसीद नहीं, कैश लेन-देन। बच्चे का भविष्य बेच दिया जा रहा है! स्कूल की यूनिफॉर्म सिर्फ स्कूल से जुड़ी खास दुकान से ही खरीदनी पड़ती है। बाहर से लाए तो बच्चे को क्लास में घुसने नहीं दिया जाता। एक सेट ड्रेस की कीमत 2400-3000 रुपये – जबकि बाजार में ८००-१००० रुपये में आसानी से मिल जाता है। स्कूल मालिकों की जेब भरने का सबसे आसान तरीका! एनसीईआरटी की किताबें छोड़कर स्कूल अपनी “स्पेशल पैक” किताबें थोप रहे हैं। पूरा सेट 5000-5000 रुपये। पुरानी किताबें काम की होने के बावजूद नई खरीदने को मजबूर। किताबों का नाम पर भी खुला धंधा चल रहा है! फीस का आतंक: मासिक फीस 4000-5000 रुपये से शुरू, लेकिन हर महीने “एक्स्ट्रा चार्ज”, “डेवलपमेंट फीस”, “एग्जाम फीस” के नाम पर 1500-2400 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। लेट फीस पर भारी पेनल्टी लगाई जाती है। अभिभावकों के नाम गुप्त रखे गए हैं।











