चुनाव हुआ, वोटों की गिनती हुई और कांग्रेस उम्मीदवार ने महज 201 वोटों से जीत दर्ज कर ली. लेकिन करीब तीन साल बाद डाक मतपत्रों यानी पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच हुई तो पूरा नतीजा ही पलट गया।अब इस चुनावी उलटफेर से जुड़े मामले में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 2023 में हुई मूल मतगणना का वीडियो आखिर कहां गया? जब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह वीडियो नहीं मिल रहा है, तो अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि ऐसे बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक की श्रृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़े इस मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. राजेगौड़ा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार डीएन जीवराज को 201 वोटों से हराया था. लेकिन डाक मतपत्रों की दोबारा जांच के बाद संशोधित नतीजे में जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया. अब राजेगौड़ा इसी प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं।
‘चुनाव आयोग का रिकॉर्ड खो कैसे गया?’
सुनवाई के दौरान राजेगौड़ा ने मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग, चुनाव पर्यवेक्षक की रिपोर्ट और दोबारा मतगणना के वीडियो उपलब्ध कराने की मांग की. अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा तो आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि 2023 की मूल मतगणना का वीडियो नहीं मिल पा रहा है।
यह जवाब सुनकर बेंच ने सवाल उठाया कि चुनाव कराने वाली संस्था अपने ही रिकॉर्ड के बारे में ऐसा कैसे कह सकती है. अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग का पूरा काम ही चुनाव कराना है और इसके लिए जरूरी दस्तावेजों का सुरक्षित रहना भी अहम है।
सुप्रीम कोर्ट बेंच ने सख्त लहजे में कहा, ‘चुनाव आयोग कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया है? आपका पूरा उद्देश्य चुनाव कराना है और आपके पास दस्तावेज होने चाहिए.’
अदालत ने फिर चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक उसके पास जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उन्हें पेश किया जाए. साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है. कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह के कमजोर बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को होगी. तब तक चुनाव आयोग को उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने होंगे।
पहले 201 वोट से जीत, फिर दोबारा गिनती में बदला खेल
इस पूरे विवाद की जड़ 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में है. श्रृंगेरी सीट पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा ने बीजेपी के डीएन जीवराज को सिर्फ 201 वोटों से हराया था. जीवराज ने इस परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
6 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने डाक मतपत्रों की दोबारा जांच का आदेश दिया. इसमें मूल मतगणना के दौरान खारिज किए गए 279 डाक मतपत्रों का फिर से सत्यापन भी शामिल था. इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने दोबारा जांच की प्रक्रिया पूरी की और 3 मई 2026 को संशोधित नतीजा घोषित कर दिया. इस प्रक्रिया में राजेगौड़ा के मतों में 255 की कमी दर्ज की गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया. इस तरह पहले कांग्रेस के खाते में गई सीट बाद में बीजेपी के खाते में चली गई।
इस चुनाव नतीजे के खिलाफ राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनका सवाल है कि जब हाई कोर्ट ने कुछ खास डाक मतपत्रों की दोबारा जांच का आदेश दिया था, तो क्या रिटर्निंग ऑफिसर को पहले से वैध घोषित किए गए मतपत्रों की भी दोबारा जांच करने का अधिकार था?
राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि हाई कोर्ट का आदेश केवल 279 खारिज डाक मतपत्रों के पुनः सत्यापन तक सीमित था. उनके मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने इसके दायरे से आगे बढ़कर उन मतपत्रों को भी दोबारा जांचा, जिन्हें पहले वैध मानकर उनके पक्ष में गिना गया था.
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया है कि जब भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोपों पर हाई कोर्ट के निष्कर्ष उनके पक्ष में थे, तो फिर दोबारा मतगणना की जरूरत क्यों पड़ी. उनका दावा है कि इस प्रक्रिया ने चुनावी नतीजे को प्रभावित किया.
सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है राहत
राजेगौड़ा की याचिका पर मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी थी. शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि याचिका लंबित रहने के दौरान वह विधायक बने रहेंगे. साथ ही, दोबारा मतगणना के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उठाए गए परिणामी कदमों को आगे की जांच तक रोकने का निर्देश भी दिया गया था.
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया था कि क्या रिटर्निंग ऑफिसर ने हाई कोर्ट के निर्देशों से आगे जाकर पहले से वैध घोषित किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच की. ऐसे में अब मूल मतगणना का वीडियो और अन्य रिकॉर्ड इस विवाद की पड़ताल में अहम हो सकते हैं.


मतगणना का वीडियो दो, वरना…’









