
इंसानियत की मिसाल बनीं,डॉ. प्रिया सिंह, गरीब महिला के लिए जुटाया 4 यूनिट रक्त
(आशा भारती नेटवर्क)
गिरजा शंकर गुप्ता/अंबेडकर नगर। डॉक्टर का दायित्व केवल मरीज का इलाज करना ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय उसके साथ खड़ा होना भी है। इसी सोच को अपने व्यवहार और कार्यशैली से साकार कर रही हैं महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ आचार्य डॉ. प्रिया सिंह MBBS, MS ऑब्स.गाइनीएसोसिएट प्रोफेसर,हाल ही में एक गरीब महिला के ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान जब उसके शरीर में रक्त की भारी कमी सामने आई, तो डॉ. प्रिया सिंह ने चिकित्सकीय जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय संवेदना का परिचय दिया। उनके प्रयास से महिला के लिए 4 यूनिट रक्त की व्यवस्था कराई गई। इतना ही नहीं, निजी ब्लड बैंक में लगने वाला करीब 2400 रुपये का शुल्क भी उन्होंने अपनी ओर से वहन किया।रक्त की व्यवस्था में बरकत अली, सत्यम गुप्ता बसखारी, मुराद अली, अमित कुमार और शांति राजभर सहित सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसी ने स्वयं रक्तदान किया तो किसी ने रक्त की व्यवस्था में मदद की।
मरीजों के प्रति जिम्मेदारी ही बनी पहचान
डॉ. प्रिया सिंह की पहचान सिर्फ एक कुशल चिकित्सक के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने मृदुल स्वभाव, सहज व्यवहार और मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैये के लिए भी बन रही है। जरूरतमंद मरीजों की परेशानी को समझना और इलाज के साथ हरसंभव सहयोग करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा नजर आता है।विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के प्रति उनका सहयोग यह संदेश देता है कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा भी है।डॉ. प्रिया सिंह की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच उनका सरल व्यवहार तथा अपने कार्य के प्रति जिम्मेदारी उन्हें एक संवेदनशील और सेवाभावी चिकित्सक के रूप में अलग पहचान दे रही है।
“दवा के साथ दुआ भी मिले, यही है सच्ची चिकित्सा सेवा”—डॉ. प्रिया सिंह का यह प्रयास इसी भावना को मजबूत करता दिखाई देता है।




चिकित्सा सेवा केवल पेशा ही








