
(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकर नगर। पाक रमजान महीने में अपने रब (अल्लाह) को राजी करने के लिए बड़ों के साथ मासूम बच्चे भी रोजा रख रहे हैं। कुछ मासूम बच्चों ने अपने जिंदगी का पहला रोजा रख कर दिन भर इबादत के साथ शाम को रोजा इफ्तार किया।
दीन का जज्बा बड़ों के साथ बच्चों में भी कम नहीं है। तभी तो रमजान के शुरू होते ही बड़ों के साथ बच्चों ने भी इस रमजान का पहला रोजा रखा। इनमें से कई का उनकी जिंदगी का पहला रोज़ा था।
मोहम्मद अहमद मसूदी ने आज अपने जिंदगी का पहला रोजा रखा , उम्मे सलमा ( सिमरन) ने अपने जिंदगी का दूसरा रोज़ा रखा। शाम को इफ़्तार के वक्त प्यास की शिद्दत , भूख की तड़प , प्यासें होंठ देख कर मासूम बच्चों के वालिद, वालिदेन ने उनकी हौसला अफजाई करते हुए इनामात से नवाजा।
बुधवार को चांद निकलने के बाद रात में सोने से पहले बच्चों ने अपनी मां और बड़ों से वादा लिया कि वो उन्हें सेहरी में जगा देंगी। सेहरी के बाद नन्हे रोजेदारों ने हिम्मत बांधकर भूख प्यास की परवाह किए बगैर दिन भर रोजा रख कर शाम को बड़ों के साथ इफ्तार की तो उनके मां-बाप की खुशी का ठिकाना ना रहा उन्होंने अपने बच्चों को खूब दुआएं दी। 
न्यौरी निवासी अनीस मसूदी के( 8) साल के साहबजादे मोहम्मद अहमद मसूदी ने इस रमजान में अपने जिंदगी का पहला रोजा रखा और साथ ही साथ उम्मे सलमा ( सिमरन) ने भी अपने जिंदगी का बृहस्पतिवार को दूसरा रोजा रखा। छोटी सी उम्र में जब पूरा दिन भूखा प्यासा रहकर नन्हे मोहम्मद अहमद मसूदी एवं उम्मे सलमा (सिमरन) ने खजूर से इफ्तार की तो दादा शरीफ मसूदी, वालिद अनीस मसूदी के साथ बच्चों के अम्मी ,दादी सहित पूरे परिवार के लोगों की आंखें भर आई और सभी ने मोहम्मद अहमद मसूदी एवं उम्मे सलमा (सिमरन) को तोहफे और ढेर सारी दुआएं दी।
मोहम्मद अहमद मसूदी, उम्मे सलमा (सिमरन) के भाई अमीन मसूदी एवं बच्चों के मामू ने दूरभाष के माध्यम से मुबारकबाद दी।










