अंबेडकरनगर। (आशा भारती नेटवर्क)विकास खंड की विकास योजनाओं में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) की टीम ने 16 ग्राम पंचायतों का ऑडिट किया तो 76 लाख 3 हजार 131 रुपये का गबन पकड़ा गया। अब इन गांवों के तत्कालीन ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों पर आरसी (रिकवरी प्रमाण-पत्र) जारी कर वसूली शुरू कर दी गई है। सबसे बड़ी बात यह कि दो सेवानिवृत्त सचिवों से भी रकम वसूली की जाएगी।इस मामले को और गंभीर बनाते हुए सूत्र बता रहे हैं कि यह सिर्फ 16 गांवों का आंकड़ा है। अगर इसी तर्ज पर पूरे जनपद के सभी 500+ ग्राम पंचायतों में पुराने ऑडिट कराए जाएं तो भ्रष्टाचार की ऐसी बड़ी लहर सामने आ सकती है कि पूरा प्रशासन हिल जाए।ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार गड़बड़ी वाले प्रमुख गांव और आरोपी…….
*विकास खंड भीटी (बस्तीपुर, दिलावलपुर, मिझौड़ा, पूनम पांडे, खूखूतारा आनंद सिंह, घूरनपुर निर्मला आदि)विकास खंड टांडा (काजीपुर जितेंद्र कुमार, कजरीनंदापुर प्रवीण कुमार, घुरहूपुर सुरेंद्र कुमार सिंह आदि)विकासखंड अकबरपुर(अमरदीप पांडे, रवींद्र कुमार चौधरी, रामजीत शास्त्री आदि)विकास खंड कटेहरी (कमलेश रंजन, जयदेव मिश्र, जगदंबा प्रसाद शुक्ल आदि)इनके अलावा रामजीत यादव, सरिता शुक्ला, उर्मिला यादव, रेखा, सरैया* आदि सचिवों पर भी गबन का आरोप है।
*बस्तीपुर में 4 कार्यों में 6,44,314 रुपये,दिलावलपुर में 3 कार्यों में 12,46,048 रुपये मिझौड़ा में 3 कार्यों में 8,54,407 रुपये,घूरनपुर में 1 कार्य में 1,50,550 रुपये ,अमीनपुर में 2 कार्यों में 49,900 रुपये*
और कई अन्य गांवों में लाखों-लाखों के गबन के आंकड़े हैं।
*विशेष बात यह है कि दो सेवानिवृत्त पंचायत सचिव इंद्रभान मिश्र और जगदंबा प्रसाद शुक्ल* पर भी एक-एक गांव में गबन का आरोप लगाया गया है। इनसे भी आधी-आधी राशि की वसूली ग्राम पंचायतवार तत्कालीन प्रधान व सचिवों से की जाएगी।डीपीआरओ का सख्त रुखउपेंद्र पांडे, डीपीआरओ ने कहा,
“ऑडिट आपत्तियों पर साक्ष्य और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर गबन के आरोपी तत्कालीन प्रधानों व सचिवों को आरसी भेज दी गई है। अनुपालन न करने पर भू-राजस्व की भांति वसूली कराई जाएगी।”स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 16 गांवों में ही इतना बड़ा गबन सामने आया है तो पूरे अंबेडकरनगर जनपद के सभी ग्रामों में इसी तरह के ऑडिट कराए जाएं। विकास खंड भीटी, टांडा, अकबरपुर और कटेहरी से शुरू होकर बाकी सभी ब्लॉकों में 2017-18 और 2018-19 के खर्चे की जांच हो तो भ्रष्टाचार की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।यह मामला सिर्फ 76 लाख का नहीं है। यह पूरे पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की झलक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस खुलासे के आधार पर पूरे जनपद स्तर पर कितनी बड़ी कार्रवाई करता है।











