Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

राम मंदिर चढावा चोरी: अयोध्या के वकील आरोपी चंदा चोरों का नहीं लड़ेंगे केस, क्या हैं इसके कानूनी और संवैधानिक पहलू

Author Image
Written by
Asha Bharti News

ई दिल्ली: जैसी कि खबर आ रही है, राम मंदिर चढ़ावे के कथित चोरों के खिलाफ वकील एक जुट हो गए हैं। अयोध्या के फैजाबाद बार एसोसिएशन में राम मंदिर दान चोरी मामले के आठ आरोपियों की पैरवी नहीं करने का प्रस्ताव चर्चा का विषय बना है।

Advertisement Box

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय आम सभा की बैठक में लिया जाना है। दूसरी ओर, भारतीय संविधान प्रत्येक आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी सहायता का अधिकार देता है, चाहे आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो। फिर क्या होगा इन तथाकथित चोरों के साथ…!

बार एसोसिएशन की बैठक और वकीलों का रुख

राम मंदिर दान चोरी मामले में आम जनता की भावनाएं बड़े स्तर पर आहत हुई हैं। अब अयोध्या के स्थानीय वकीलों ने राम मंदिर चढ़ाव चोरी के मामले में तथाकथित आरोपियों की पैरवी नहीं करने की इच्छा जताई है। इस विषय पर फैजाबाद बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक बुलाई गई है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा के अनुसार अंतिम निर्णय बैठक में सर्वसम्मति से लिया जाना है। स्थानीय वकीलों का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित गबन से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच कहां तक पहुंची?

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम SIT ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित गबन की रकम से जुड़ी लगभग ₹79.85 लाख की राशि बरामद की गई है। पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी भी की है और वित्तीय लेन-देन की जांच भी जारी है। जांच में दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

क्या किसी आरोपी को वकील मिलने का अधिकार है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के अधिवक्ता से सलाह लेने और उसका बचाव कराने का अधिकार देता है। भारत का Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत आरोपियों को निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। यदि किसी स्थान के सभी स्थानीय वकील किसी मामले की पैरवी से मना कर दें, तो अदालत अन्य जिलों के अधिवक्ताओं की नियुक्ति या विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से वकील उपलब्ध करा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश और बार काउंसिल का फैसला

दरअसल…सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यह साफ कर चुका है कि किसी आरोपी को अदालत में कानूनी प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं किया जा सकता। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के एडवोकेट से जुड़े नियम अधिवक्ताओं से पेशेवर नैतिकता का पालन करने की उम्मीद करते हैं। हालांकि किसी रुप में व्यक्तिगत अधिवक्ता को किसी मामले को स्वीकार करने या न करने की आजादी है। लेकिन पूरे बार द्वारा सामूहिक बहिष्कार किया जाने पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यदि आरोपी को स्थानीय स्तर पर वकील नहीं मिलता, तो अदालत निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती है, मसलन अदालत इस मामले में न्याय मित्र की नियुक्ति कर सकती है।

कानून से ही आरोपियों को मिलेगा निष्पक्ष न्याय

दरअसल इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है राम मंदिर देश के करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। ऐस में भक्तो के चढ़ाए गए चढ़ावे में चोरी के आरोपों से जनता काफी दुखी है। अयोध्या के वकीलों द्वारा आरोपियों की पैरवी न करने की पहल इसी का परिणाम है। लेकिन उनके फैसले ने संवैधानिक अधिकारों, अधिवक्ताओं की नैतिक जिम्मेदारी और निष्पक्ष न्याय के सिद्धांतों पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि यदि स्थानीय बार आरोपियों की पैरवी नहीं भी करता है, तब भी भारत का कानूनयह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक आरोपी को सक्षम कानूनी प्रतिनिधित्व मिले।

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box

गुरुवार, 16 जुलाई 2026

आज का सुविचार

शिक्षा की जड़ें भले ही कड़वी हों, पर उसका फल हमेशा मीठा होता है। हर दिन कुछ नया सीखने की आदत आपको सफलता की उन ऊंचाइयों तक ले जाएगी जिसका आपने सपना देखा है।

Advertisement Box

और भी पढ़ें

[news_reels]
WhatsApp