अंबेडकरनगर 30 सितम्बर 2026। (आशा भारती नेटवर्क) जिला उद्यान अधिकारी ने जनपद के आलू उत्पादक किसानों को
अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषक हित में निजी शीतगृहों में भण्डारित आलू के भण्डारण प्रभार पर अनुदान प्रदान किए जाने की योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत निजी शीतगृहों में आलू भण्डारित करने वाले पात्र किसानों को भण्डारण प्रभार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रति कृषक अधिकतम 02 हेक्टेयर क्षेत्रफल एवं 200 कुन्तुल आलू के भण्डारण पर 100 रुपये प्रति कुन्तल की दर से अनुदान देय होगा। योजना का लाभ पट्टाधारक कृषकों को भी मिलेगा। भण्डारित आलू की निकासी के उपरांत ही अनुदान राशि देय होगी। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि परिवार रजिस्टर एवं भू-अभिलेखों के आधार पर पात्रता निर्धारित की जाएगी तथा सहायता राशि लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाएगी। परिवार के सदस्यों को भू अभिलेख में दर्ज रकबे के अनुसार पृथक-पृथक अनुदान का लाभ प्रदान किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को आधार कार्ड अथवा कृषक आईडी के माध्यम से ई-के वाईसी, बैंक पासबुक/चेकबुक की छायाप्रति, अद्यतन खसरा खतौनी शीतगृह द्वारा जारी आमद रसीद, भण्डारण रसीद, भण्डारण प्रभार भुगतान रसीद, निकासी रसीद एवं गेट पास सहित अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिन किसानों ने निजी शीतगृहों में आलू भण्डारित किया है, वे 16 अक्टूबर 2026 तक संबंधित कोल्ड स्टोरेज पर जाकर अथवा ऑनलाइन पोर्टल potato.uphorticulture.in पर आवेदन अवश्य करा लें, ताकि सहायता राशि समय से उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जा सके। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से अपील की कि योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सही एवं स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में किसी प्रकार की कमी या जानकारी में अंतर होने पर आवेदन के सत्यापन में परेशानी आ सकती है। इसलिए किसान आवेदन करने से पहले अपने आधार कार्ड, बैंक खाते और भूमि संबंधी अभिलेखों में दर्ज विवरण की अच्छी तरह जांच कर लें। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना जरूरी है है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो और खाते का विवरण वरण सहा सही हा, हो, क्योंकि स्वीकृत अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का उद्देश्य किसानों को निजी शीतगृहों में आलू के भंडारण पर आने वाले खर्च में आर्थिक राहत उपलब्ध कराना है। आलू जैसी प्रमुख फसल के उत्पादन के बाद किसानों को उसके सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता होती है, ताकि वे अपनी उपज को उचित समय पर बाजार में बेच सकें।











