
सीआईएसएफ बटालियन के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ शहीद अंकित को दी अंतिम सलामी
अंबेडकर नगर। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में देश की सुरक्षा करते हुए बलिदान हुए सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय का पार्थिव शरीर गुरुवार को जब उनके पैतृक गांव इब्राहिमपुर क्षेत्र के दौलतपुर एकसारा (मठिया) पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। जिस आंगन में कभी बेटे के लौटने का इंतजार होता था, उसी घर में तिरंगे में लिपटा अंकित का पार्थिव शरीर पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई। अंतिम दर्शन के लिए गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और हर जुबां पर वीर सपूत के लिए श्रद्धा थी।
एनटीपीसी स्थित सीआईएसएफ बटालियन के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ शहीद अंकित को अंतिम सलामी दी। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकली। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आसपास के लोग शामिल हुए। देश की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले अंकित को अंतिम विदाई देने उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया कि वीर सपूत भले ही दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनकी शहादत लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहती है।
अंकित सेवानिवृत्त शिक्षक शिव प्रसाद पांडेय के पुत्र थे। वर्ष 2017 में उनका चयन सीआईएसएफ में उपनिरीक्षक के पद पर हुआ था। वर्ष 2021 में विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें असिस्टेंट कमांडेंट पद पर पदोन्नति मिली। करीब एक वर्ष से वह कठुआ के बसोली क्षेत्र स्थित जलविद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। इससे पहले वह दिल्ली स्थित भारत मंडपम में तैनात रहे।
परिवार के लिए अंकित केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि घर की खुशियों का केंद्र थे। उनकी शहादत ने पिता, मां, पत्नी और बहनों को भीतर तक तोड़ दिया है। करीब 75 वर्षीय पिता शिव प्रकाश पांडेय बेटे को याद कर बार-बार बेसुध हो रहे हैं। मां प्रमिला की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। पत्नी प्रियंका की दुनिया जैसे अचानक उजड़ गई है। बहनें योगेश्वरी, ललिता, नितेश्वरी, सुधा, सीमा और अंतिमा समेत पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
ढाई साल के मासूम की आंखों में अब भी पिता का इंतजार
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया, जब घर में मौजूद अंकित का करीब ढाई वर्ष का मासूम बेटा अपने पिता को तलाशता रहा। जिस पिता की उंगली पकड़कर चलना, उनकी गोद में खेलना और उनके साथ बड़े होने का सपना उसकी छोटी-सी दुनिया में था, अब वही पिता तिरंगे में लिपटकर हमेशा के लिए उससे दूर हो गए।
मासूम शायद अभी यह समझने की उम्र में भी नहीं है कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे। उसे तो बस इतना मालूम था कि पापा आएंगे और उसे गोद में उठाएंगे। लेकिन इस बार घर लौटे अंकित ने अपने बेटे को आवाज नहीं दी। पिता की गोद का इंतजार कर रहे उस मासूम के हिस्से में अब केवल तस्वीरें, यादें और पिता की वर्दी की कहानी रह गई है।
अंकित के पिता ने अपने बेटे को देश की सेवा करते देखा था। बेटे की मेहनत, तरक्की और वर्दी पर उन्हें गर्व था। उन्हें क्या पता था कि एक दिन यही वर्दी तिरंगे में लिपटकर उनके आंगन में आएगी।
कठुआ की घटना ने परिवार से उनका बेटा, पत्नी से उनका जीवनसाथी, बहनों से उनका भाई और ढाई साल के मासूम से उसका पिता छीन लिया। लेकिन अंकित की शहादत ने पूरे गांव को गर्व से भी भर दिया। गांव के लोगों के लिए वह अब सिर्फ अंकित नहीं, बल्कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाला अमर वीर सपूत हैं।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे कठुआ जिले के बसोली क्षेत्र स्थित सेवा पावर प्रोजेक्ट के सीआईएसएफ शिविर में जवानों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान एक हेड कांस्टेबल द्वारा कथित रूप से सरकारी राइफल से गोलीबारी किए जाने की घटना सामने आई। अचानक हुई फायरिंग में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय समेत चार जवानों की मौत हो गई।
अंकित का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के साथ ही पूरे क्षेत्र ने एक स्वर में अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। आंसुओं के बीच उठी उनकी अंतिम यात्रा ने यह संदेश दिया कि देश की रक्षा में दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।











