दुनिया भर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इस बीच भारत पर एक ऐसा संकट मंडराने लगा है, जिसने सबके होश उड़ा दिए हैं. भारत के पड़ोसी देश चीन ने एक ऐसी खतरनाक चेतावनी जारी की है, जिसने भारतीय मौसम वैज्ञानिकों को भी डरा दिया है।
यह संकट कोई मामूली मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि एक ऐसी आफत है जो भारत की लाइफलाइन यानी मानसून को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है. आखिर चीन ने किस संकट को लेकर अलर्ट किया है, आइए जानते हैं…
दुनिया भर के मौसम में भारी उथल-पुथल मचाने वाला अल नीनो एक बार फिर एक्टिव हो रहा है. चीन मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां बन गई हैं और यह इस साल के पतझड़ और सर्दियों के दौरान अपने पीक पर होगा।
मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार, इस बार का अल नीनो पिछले कुछ दशकों में सबसे खतरनाक रूप ले सकता है. सितंबर तक प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सुपर अल नीनो की स्थिति भी बन सकती है. वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन यानी WMO ने भी इस टाइमलाइन की पुष्टि की है.
भारत के लिए क्यों है यह चिंता की बात?
भारत अपनी सालाना बारिश का करीब 70% हिस्सा जून से सितंबर के बीच होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही प्राप्त करता है. जब भी अल नीनो एक्टिव होता है, भारत में मानसून की रफ्तार काफी कम हो जाती है. भारत में सूखे या मानसून फेल होने की आधे से भी ज्यादा घटनाएं, तभी हुई हैं, जब अल नीनो एक्टिव हुआ है. साल 2015 के अल नीनो के दौरान भारत में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ था, साथ ही जलस्तर भी बदलाव आया था।
इस साल का क्या है अनुमान
भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही अनुमान जाहिर किया है कि साल 2026 में मानसून सामान्य से कम करीब 90% रह सकता है. कुछ अनुमानों के अनुसार कुल बारिश में 8% तक की कमी आ सकती है।
करोड़ों किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले भारत के लिए अल नीनो का आना चिंता का विषय है. हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून पर अल नीनो का असर पूरी तरह से तय नहीं होता, इसलिए आने वाले कुछ हफ्ते देश के लिए बेहद अहम होंगे।










