
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि हमारे मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं. उन्होंने हिंदू राष्ट्र की चर्चा करते हुए मुसलमानों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं होना चाहिए।
नॉर्थ कैंपस स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वां प्राकट्य महोत्सव ‘राष्ट्रोत्कर्ष दिवस’ के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने 2009 के एक कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा, “किसी भी मुसलमान को डरने की जरूरत नहीं है. हमारे मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं.”
उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के गेट पर भी यही संदेश लिखा हुआ है कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है. हम सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू हैं. बाबा रामदेव ने कहा, “मुसलमानों को डराया जाता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया तो वे कहां जाएंगे. मैं मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा को अपनाएं. जो अपने पिता का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता. आप अपने पूर्वजों, ऋषि-मुनियों की बात को मानें. दाढ़ी रखें, मूंछ कटाएं, जैसे भी वस्त्र पहनें लेकिन चरित्र अपने पूर्वजों जैसा रखें.” उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए जोर दिया, “मैं फिर से कहना चाहता हूं कि मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है.”
बाबा रामदेव के बयान ‘मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं’ पर एआईएमआईएम सहित कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने योग गुरु बाबा रामदेव के बयान ‘हिंदूराष्ट्र में मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं’ पर कहा, “सुनो बाबा, मुसलमान किसी के बाप से नहीं डरता है. हम संविधान का सम्मान करते हैं. अपनी बात कायदे कानून के दायरे में रखकर करते हैं. हमारी खामोशी को डर की गिनती में मत लो. आप संविधान को मानते नहीं हैं. डरने-घबराने की क्या बात करना…”
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने योग गुरु बाबा रामदेव के बयान पर कहा, “… अगर सभी सनातनी थे तो फिर यहां इतनी दरारें डालने की कोशिश क्यों की जाती है? सभी को सनातनी मान लेना चाहिए. मैं किसी के विचार से सहमत नहीं हूं. मैं केवल कांग्रेस पार्टी के विचार से सहमत हूं. हमारा विचार वह है जो संविधान कहता है. हम संविधान में विश्वास रखते हैं. सभी की आस्था संविधान में है. हमें संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात कहनी चाहिए.”
सीताराम निवास कुंज मंदिर के संत सतेंद्र दास वेदांती जी महाराज ने योग गुरु बाबा रामदेव के बयान पर कहा, “बाबा रामदेव जी ने कुछ चीजें बहुत अच्छी कही हैं. जैसे उन्होंने कहा है कि जो अन्य समुदाय के लोग आज के हिसाब से हैं, तो वास्तव में दोनों के पूर्वज एक हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हम पूर्वजों के हिसाब से चल नहीं रहे हैं, पूर्वजों की बात को मानते नहीं हैं, ऋषि-महर्षियों की बात को मानना नहीं है, ऋषि-महर्षियों की परंपराओं से हटकर यदि हम बात करते हैं, ऋषि-महर्षियों की बातों की अवहेलना करते हैं, हमारे पूर्वज जो थे, वे ऋषि-महर्षियों की संतानें हैं और उनके हिसाब से चलते थे, उनकी विचारधारा से चलते थे. तो आज अगर हमारी उनकी विचारधारा नहीं चल पा रही है, तो हम कैसे मान लें कि हमारे पूर्वज एक हैं?”










