अंबेडकर नगर।(आशा भारती नेटवर्क) उत्तर प्रदेश पुलिस की फेहरिस्त में एक ऐसा नाम, जो अपनी सख्त कार्यशैली और सटीक फैसलों के लिए जाना जाता है—वह है आईपीएस प्राची सिंह। 2017 बैच की यह तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी वर्तमान में अंबेडकरनगर की पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में कानून का राज स्थापित करने में जुटी हैं। उनकी प्रशासनिक सूझबूझ और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है।
विरासत में मिली अनुशासन की सीख
कानपुर में जन्मीं और फतेहपुर से जुड़ीं प्राची सिंह का व्यक्तित्व उनके पारिवारिक परिवेश का आईना है। उनके पिता राम सिंह गौतम पीसीएस अधिकारी रहे हैं, जबकि उनकी माता उषा सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में उच्च प्रतिमान स्थापित किए हैं। घर का यही शैक्षणिक और अनुशासित माहौल रहा, जिसने उन्हें प्रशासनिक सेवाओं की ओर प्रेरित किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी और एलएलएम करने के बाद, उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया और 154 वीं रैंक के साथ आईपीएस बनीं।
विवाद नहीं, काम पर भरोसा प्राची सिंह का कैरियर चुनौतियों से भरा रहा है। सिद्धार्थनगर में तैनाती के दौरान उन्होंने कानून के दायरे में रहकर जिस निष्पक्षता का परिचय दिया, वह प्रशासनिक गलियारों में आज भी चर्चा का विषय है। किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे न झुकना और केवल कानून की भाषा समझना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। लखनऊ और श्रावस्ती जैसे जिलों में माफियाओं और अपराध के प्रति उनकी सख्त कार्रवाई ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ की छवि दी है।
इन तीन स्तंभों पर आधारित है उनकी पुलिसिंग: अपराध पर प्रहार: संगठित अपराध और माफियाओं के खिलाफ चलाए गए उनके विशेष अभियान अपराधियों में खौफ पैदा करते हैं।
महिला सुरक्षा सर्वोपरि: महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों पर त्वरित कार्रवाई और उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनना उनकी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा है।
पारदर्शी व्यवस्था: वे पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाती हैं, जिससे विभाग की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है।
साहस और संवेदनशीलता का मेल वर्दी के सख्त चेहरे के पीछे एक ऐसी महिला भी है, जो घुड़सवारी और पैराग्लाइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियों की शौकीन है। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, वे खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखती हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से जुड़ाव बनाकर वे पुलिस और आम नागरिक के बीच की दूरी को मिटाने का प्रयास कर रही हैं।
अंबेडकरनगर में हुई तैनाती के बाद जिले के नागरिकों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। चाहे साइबर अपराधों पर लगाम कसना हो या आमजन की समस्याओं का त्वरित निस्तारण, प्राची सिंह का स्पष्ट लक्ष्य है—’अपराध मुक्त जिला और सुरक्षित जनता।’
निष्कर्ष: उच्च शिक्षा, तेज निर्णय क्षमता और अटूट निष्ठा का संगम बनकर उभरीं आईपीएस प्राची सिंह आज न केवल अंबेडकरनगर के लिए, बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए एक प्रेरणा हैं। उनकी कार्यप्रणाली यही संदेश देती है कि यदि इरादे नेक हों, तो व्यवस्था को बदलने में समय नहीं लगता।











