
पशु चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में पशु चिकित्सीय टीम द्वारा किया जा रहा टीकाकरण
लम्पी वायरस से बचाव हेतु 1.20 लाख वैक्सीन उपलब्ध
(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकर नगर 11 सितम्बर, 2026। जिले में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) से गोवंशीय पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। आठ सितंबर से शुरू हुए अभियान के तहत जिले में 1.20 लाख लम्पी वैक्सीन उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में पशुधन प्रसार अधिकारियों और पैरावेट की टीम गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण कर रही है।
लम्पी स्किन डिजीज विषाणुजनित बीमारी है, जो गोवंशीय पशुओं में होती है। बरसात के मौसम में मक्खी, मच्छर और पिस्सू के काटने से इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, जिले में अभी तक इस बीमारी के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। पशुपालकों को एहतियात के तौर पर अपने सभी गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण कराने की सलाह दी गई है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बीमारी के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, मुंह से लार गिरना, शरीर के विभिन्न हिस्सों में गांठें निकलना, पैरों में सूजन और लंगड़ाहट शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालक संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से कम से कम 10 मीटर की दूरी पर अलग रखें और तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। पशु चिकित्सा संबंधी सहायता के लिए 1962 पर भी फोन किया जा सकता है।
पशुपालकों को पशुशाला में शाम के समय नीम की पत्तियों का धुआं करने तथा दो-चार दिन के अंतराल पर कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। पशु संक्रमित होने पर उसे चरने के लिए बाहर नहीं भेजना चाहिए। घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समय से पशु चिकित्सक की सलाह लेने पर जोर दिया गया है।
यदि पशु के शरीर पर बनी गांठ या घाव फूट जाए तो नीम की पत्तियों या पोटैशियम परमैंगनेट के घोल से साफ-सफाई करने तथा एंटीसेप्टिक मलहम लगाने की सलाह दी गई है, ताकि घाव पर मक्खी-मच्छर न बैठें। पशु की मृत्यु होने की स्थिति में शव को खुले में फेंकने के बजाय गड्ढा खोदकर नियमानुसार जमीन में दफन करने को कहा गया है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि पशुपालकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जिले में बीमारी से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।










