(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकर नगर। एक समय ऐसा था जब खान मुबारक और उसके भाई का नाम अपराध की दुनिया में प्रभाव और खौफ दोनों का पर्याय माना जाता था। पूर्वांचल के कई जिलों तक फैले नेटवर्क, गंभीर आपराधिक मुकदमों और गैंग संचालन के आरोपों ने खान बंधुओं को लंबे समय तक सुर्खियों में बनाए रखा।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद वर्षों तक यह नाम चर्चा के केंद्र में रहा, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हालांकि कुख्यात माफिया खान मुबारक मर चुका है, लेकिन अब तमाम कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है जो किसी न किसी रूप में ऐसे नेटवर्क से जुड़ी रही हैं।
बसखारी पुलिस द्वारा चोरी के एक मामले में खान मुबारक की बहन, भांजे और भांजी की गिरफ्तारी ने जिले में नई चर्चा की शुरुआत कर दी है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 43 लाख रुपये से अधिक कीमत के सोने-हीरे के आभूषण और नकदी बरामद करने का दावा किया है। गिरफ्तारी के बाद तीनों को न्यायालय भेज दिया गया। यह कार्रवाई अपने आप में एक आपराधिक मामले का खुलासा है, लेकिन इसके राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ भी कम नहीं हैं।
दरअसल, संगठित अपराध की दुनिया में किसी गैंग की ताकत केवल उसके मुखिया से नहीं बल्कि उसके आसपास खड़े सहयोगी तंत्र, आर्थिक स्रोतों और सामाजिक नेटवर्क से भी तय होती है। यही कारण है कि पुलिस अब उन बिंदुओं पर भी नजर रख रही है जो वर्षों से चर्चा से दूर रहे। माना जा रहा है कि अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान का फोकस अब केवल नामी अपराधियों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके प्रभाव क्षेत्र और संपर्क तंत्र तक भी पहुंच रहा है।
पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के कार्यकाल में अपराधियों के खिलाफ लगातार आक्रामक कार्रवाई देखने को मिली है। हिस्ट्रीशीटरों, गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों पर की जा रही कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि पुलिस अपराध के पुराने ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। माफिया नेटवर्क भले ही कमजोर पड़ गया हो, लेकिन उसकी बची हुई कड़ियों पर भी पुलिस की नजर बनी हुई है।











