टांडा तहसील के नवागत उप जजिलाधिकारी के सामने बड़ी चुनौती*
अंबेडकर नगर, 23 जुलाई। (आशा भारती नेटवर्क) जिले की टांडा तहसील से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने है, जो वर्षों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि टांडा खास का मूल राजस्व नक्शा कई दशक पहले गायब हो गया, जिसके कारण भूमि संबंधी विवादों का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नक्शे के अभाव में कई मामलों में पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया कठिन हो जाती है, जिससे आम नागरिकों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ता है।
मिली जानकारी के अनुसार बीते कई दशकों में टांडा तहसील में कई उपजिलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी आए और उनका कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन गायब नक्शे का पता नहीं चल सका। यह भी बताया जाता है कि नक्शा गायब होने के संबंध में टांडा कोतवाली में सूचना दी गई थी और मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नक्शा किन परिस्थितियों में गायब हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नक्शा उपलब्ध न होने से जमीन की पैमाइश, सीमांकन और स्वामित्व से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी होती है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि इस स्थिति का फायदा कुछ प्रभावशाली लोग और कथित भूमाफिया उठाते हैं, जबकि आम व्यक्ति अपनी ही जमीन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
राजस्व व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि किसी महत्वपूर्ण अभिलेख का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो नियमानुसार उसकी वैकल्पिक प्रति उपलब्ध कराने अथवा संबंधित विभाग से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और विवादों का समाधान पारदर्शी तरीके से हो।
नवागत उपजिलाधिकारी के सामने बड़ी परीक्षा
टांडा तहसील में हाल ही में कार्यभार संभालने वाले उपजिलाधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान माना जा रहा है। क्षेत्र के लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता से समीक्षा करेगा, गायब नक्शे की स्थिति स्पष्ट करेगा और यदि आवश्यक हो तो नियमानुसार नया अधिकृत नक्शा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इससे वर्षों से लंबित भूमि विवादों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।
जनता का कहना है कि प्रशासन यदि इस मामले में पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है तो न केवल लोगों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि राजस्व व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि टांडा तहसील का यह वर्षों पुराना मामला आखिर कब तक सुलझता है और लोगों को उनकी जमीन से जुड़े विवादों में राहत मिलती है।











