UP MLC Elections: विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर को होने हैं. इनमें से छह शिक्षक सीटों पर चुनाव होना है. इन चुनावों को सूबे की सत्ता पर काबिज योगी सरकार बेहद गंभीरता से ले रही हैं।
वैसे भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पार्षद से लेकर सांसद तक के हर चुंब को गंभीरता से लड़ती रही. ऐसे में अब विधानसभा चुनावों के पहले होने वाले इन चुनावों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने विपक्ष को शिकस्त देने की ठानी हैं. पार्टी की यह मंशा पूरी हो इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने वाराणसी और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने लखनऊ में यह स्पष्ट शब्दों में यह बता दिया है कि सूबे की 11 एमएलसी सीटों पर चुनाव के दौरान विधायकों की कापी इस मानक पर भी जांची जाएगी कि उनके क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन क्या रहा।
यानी जिस भी विधायक के क्षेत्र में एमएलसी चुनावों भाजपा का उम्मीदवार चुनाव हार तो उस क्षेत्र के विधायक का टिकट कटेगा। भाजपा नेतृत्व के इस ऐलान के बीच में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने नामांकन से ठीक पहले कुछ प्रत्याशी बदलकर इस लड़ाई को और रोचक बना दिया है. जिसके चलते गोरखपुर में एमएलसी चुनाव में मुकाबला काफी रोचक हो गया है. सपा के इस दांव के बाद भाजपा ने भी भाजपा ने शिक्षक संघ में सेंध लगाकर हार से बचाने का स्टॉक खेला है।
इन सीटों सीटों पर भाजपा की नजर जमी
भाजपा नेताओं के अनुसार, गोरखपुर में ध्रुव कुमार त्रिपाठी पिछली बार शिक्षक संघ शर्मा गुट के टिकट पर प्रत्याशी थे. तब वह भाजपा के बाहरी समर्थन से जीते थे. इस बार भाजपा ने उनको ही अपना प्रत्याशी बनाया है. मुख्यमंत्री योगी के गृह जनपद गोरखपुर में सपा ने यहां पहले कमलेश यादव को प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन बाद भी अखिलेश यादव ने संजयन त्रिपाठी चुनाव मैदान में उतार दिया।
संजयन त्रिपाठी इस बार यहां से भाजपा का टिकट चाह रहे थे, लेकिन सीएम योगी ने उनके मांग पर ध्यान नहीं दिया तो सपा ने उनको अपना प्रत्याशी बना दिया. अब गोरखपुर में पिछली बार रनर रहे अजय सिंह वित्तविहीन शिक्षक महासभा से, ध्रुव कुमार त्रिपाठी भाजपा और भाजपा से नाता तोड़कर आए संजयन त्रिपाठी सपा के प्रत्याशी हैं।
इसी तरह वाराणसी में शिक्षक संघ शर्मा गुट के डॉ. प्रमोद मिश्रा पालाबदल भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. यहां पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव सपा की तरफ से मजबूत प्रत्याशी हैं. उनको निजी स्कूलों का खुलकर समर्थन मिल रहा है. इस सीट से चंदेल गुट के चेत नारायण सिंह भी चुनाव लड़ रहें हैं.
लखनऊ शिक्षक सीट से भाजपा ने वर्तमान एमएलसी उमेश द्विवेदी को टिकट दिया है. जबकि सपा ने सुशील सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है. सुशील सिंह पूर्व एमएलसी एसपी सिंह की बड़ी स्कूल चेन के कर्ता-धर्ता है. कुल मिलकर लखनऊ में भी भाजपा उम्मीदवार को यहाँ कड़ी टक्कर मिल रही हैं।
आगरा में शिक्षक सीट पर वर्तमान एमएलसी आकाश अग्रवाल की चर्चा थी कि वह भाजपा के प्रत्याशी हो सकते है, लेकिन भाजपा से उनको टिकट नहीं मिला. फिर भी नामांकन से ठीक पहले सपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर आकाश अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतार दिया. आगरा में अब भाजपा ने कर्मचारी नेता हरिकिशोर तिवारी को प्रत्याशी है।
इस तरह अब आगरा में भाजपा प्रत्याशी को सपा और शिक्षक संघ शर्मा गुट के प्रत्याशी दिलीप कुमार अमौरिया की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है. शिक्षक सीटों पर भाजपा का झांडा फहराने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी विधायकों को इसकी ज़िम्मेदारी सौंपी है। विधायक दायित्व को पूरा करने में असफल होंगे तो उनका टिकट कटेगा. यह ऐलान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी प्रभारी दोनों ही कर चुके हैं।
भाजपा-सपा की तैयारी
वर्ष 2020 में दस सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि हवा खिलाफ होने के बाद भी सपा को तीन सीटों पर जीत मिली थी. इस बार सीटें बढ़ाने की कसरत में जुटी सपा ने भाजपा के कई नाराज चेहरों को अपने साथ जोड़ा है. अयोध्या-गोरखपुर क्षेत्र शिक्षक खंड पर भाजपा के बागी संजयन सपा के टिकट पर मैदान में हैं।
आगरा एवं प्रयागराज-झांसी खंड में भी भाजपा के कई पदाधिकारियों के बीच मतभेद उभरे हैं. इसका लाभ लेने की फिराक में सपा नेता जुटे हैं. वही दूसरी तरफ भाजपा ने एमएलसी चुनाव के दृष्टिगत सभी ब्लाकों में एक-एक प्रभारी नियुक्त किया है. विधायकों, सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों और कमिश्नरों में लगाया गया है।
भाजपा नेताओं की इस तरह की जा रही तैनाती को लेकर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े कहते हैं कि हर बूथ सबसे मजबूत करना होगा. भले ही स्नातक एवं खंड शिक्षा क्षेत्र के चुनाव में विधानसभा की तरह ज्यादा मत नहीं पड़ते, लेकिन इससे एक नैरेटिव अवश्य बनता है. फिलहाल भाजपा नेता एमएलसी चुनावों में जीत हासिल कर यूपी में अखिलेश यादव के पीडीए की धार कुंद करने के प्रयास में हैं।









