
- जिलाधिकारी ने कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों, एफपीओ, सीएचसी लाभार्थियों एवं प्रगतिशील कृषकों के साथ की बैठक
- पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए बीट कांस्टेबल, ग्राम प्रहरी, राजस्व कर्मियों एवं ग्राम प्रधानों को सक्रिय रखने के निर्देश
- बिना एसएमएस के कम्बाइन हार्वेस्टर संचालित करने पर होगी सीज करने की कार्रवाई, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में 5 हजार से 30 हजार रुपये तक वसूली का प्रावधान
- पराली प्रबंधन के लिए जनपद स्तरीय हेल्प लाइन नंबर 9151701626 जारी*
(आशा भारती नेटवर्क) अंबेडकरनगर 30 अक्टूबर 2026। जिलाधिकारी श्रीमती ईशा प्रिया की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी श्री वैभव मिश्रा की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के समस्त कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) के लाभार्थियों एवं प्रगतिशील कृषकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में पराली एवं कृषि अपशिष्ट जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम, फसल अवशेष प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं किसानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि अपशिष्ट एवं पराली जलाने से वायु प्रदूषण में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसका मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस गंभीर विषय को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी संज्ञान में लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सतत निगरानी एवं कड़ी प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए बीट कांस्टेबल, ग्राम प्रहरी, राजस्व कर्मियों तथा ग्राम प्रधानों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर निरंतर सूचनाएं प्राप्त की जाएं और किसी भी स्थिति में पराली जलाने की घटनाओं को बढ़ावा न मिलने पाए।
जिलाधिकारी ने बताया कि पराली प्रबंधन एवं इससे संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जनपद स्तर पर हेल्प लाइन नंबर 9151701626 जारी किया गया है। उन्होंने उप कृषि निदेशक को उक्त व्यवस्था की सतत मॉनीटरिंग करने तथा प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी स्तर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति किसानों और आमजन को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, ब्लॉक, थाना, तहसील एवं जनपद स्तर पर निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके अंतर्गत चौपाल, गोष्ठी, किसान दिवस, समाचार पत्रों एवं अन्य मीडिया माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर सतत निगरानी रखी जाए और यदि कहीं भी फसल अवशेष जलाने की घटना संज्ञान में आती है तो उसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
बैठक में उपनिदेश कृषि ने बताया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के संबंध में बताया कि भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार पराली जलाने पर कृषक से भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल किए जाने का प्रावधान है। इसके तहत 2 एकड़ से कम भूमि पर 5,000 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक भूमि पर 10,000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 30,000 रुपये तक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल की जा सकती है।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्री वैभव मिश्रा ने समस्त खंड विकास अधिकारियों, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से किसानों से पराली एकत्रित कर उसे निकटवर्ती सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे किसानों को पराली के बदले उचित मूल्य भी प्राप्त हो सके। उन्होंने कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के बिना संचालित न किया जाए। निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित कम्बाइन हार्वेस्टर को सीज करने के साथ ही नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उप कृषि निदेशक ने जनपद के समस्त कृषक उत्पादक संगठनों से अपील की कि वे अधिक से अधिक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करें तथा उनसे पराली प्राप्त कर उसे गौशालाओं में दान करने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि पराली का उपयोगी निस्तारण सुनिश्चित हो सके और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके।
बैठक में जिला विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी सहित जनपद, तहसील एवं विकासखंड स्तर के संबंधित अधिकारी तथा कम्बाइन हार्वेस्टर संचालक, एफपीओ प्रतिनिधि एवं प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।


पराली जलाने की घटनाओं पर









