(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लान आॅफ एक्शन 2026-27 के अनुपालन में चन्द्रोदय कुमार जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के निर्देशानुसार आज दिनांक 05.11.2026 कोेे राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या, में बाल अधिकार एवं बच्चों के हितार्थ कानूनों के सम्बन्ध में श्रीमती नीलम वर्मा,सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण किया गया। साक्षरता शिविर में श्रीमती नीलम वर्मा,सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, जि0वि0से0प्रा0 अम्बेडकरनगर के कर्मचारी तथा बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या से केयर टेकर अन्य स्टाफ एवं बाल अपचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा बताया गया कि बाल अधिकार बच्चों के वे बुनियादी मानवाधिकार हैं जो 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति के स्वस्थ विकास, सुरक्षा और सम्मान के लिए जरूरी हैं। प्रमुख बाल इस प्रकार हैं, जीने का अधिकार जन्म लेने, स्वास्थ्य देखभाल और भरण पोषण का अधिकार, विकास का अधिकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल और मानसिक विकास के अवसर, सुरक्षा का अधिकार बाल श्रम, बाल विवाह, हिंसा और शोषण से बचाव, सहभागिता का अधिकार, अपनी बात रखने और निर्णयों में शामिल होने की स्वतंत्रता, बच्चों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए सरकार के राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग पोर्टल पर जा सकते हैं या चाइल्डलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सकते हैं। सचिव महोदया द्वारा बाल हितार्थ कानूनों के सम्बन्ध मंे जानकारी देते हुये बताया गया कि संवैधानिक अधिकारों में अनुच्छेद 21 के अनुसार 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार, अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी जोखिम भरे कारखाने या काम में लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध, अनुच्छेद 39 के अनुसार राज्य को बच्चों को स्वस्थ तरीके से विकसित होने के अवसर और सुविधाएं देने का निर्देश देता है।
श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या परिसर की स्वच्छता, किशोर अपचारियों के खाने पीने एवं उनके स्वास्थय के सम्बन्ध में शिक्षा तथा मनोरंजन के साधनों पर जानकारी ली गई। बाल अपचारियों को किसी प्रकार की अस्वस्थता होने पर अविलम्ब चिकित्सा सुविधा दिलवाये जाने हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये एवं किशोर अपचारियों से उनकी समस्या सुनी गई एवं पूछा गया कि क्या सभी अपचारियों के पास अधिवक्ता हैं अथवा नहींे उनके मुकदमों की पैरवी ठीक से हो रही है अथवा नहीं एवं यदि किसी अपचारी के पास अधिवक्ता नहीं है अथवा कोई समस्या है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रार्थना पत्र देकर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर अपनी पैरवी करवा सकते हैं।










