- चरणबद्ध आंदोलन की दी चेतावनी
(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकरनगर। जिला अनुदानित महाविद्यालय शिक्षक संघ ने प्रदेश संगठन उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के आवाह्न पर अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के शिक्षकों की लम्बित समस्याओं व मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सम्बोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी अम्बेडकर नगर के माध्यम से प्रेषित किया। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति पर ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट श्रीमती मधुलिका सिंह ने ज्ञापन प्राप्त किया। जिला इकाई ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से समस्याओं का समाधान न होने के कारण प्रदेश भर के उच्च शिक्षा शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते संगठन को चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी है।
जिला अनुदानित महाविद्यालय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अतुल मिश्र और मीडिया प्रभारी डॉ. शशांक मिश्र के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षकों के सेवा, वित्तीय एवं शैक्षणिक अधिकारों से जुड़े प्रमुख मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया गया।
महासंघ की प्रमुख मांगें:
पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभ: जनप्रतिनिधियों एवं न्यायपालिका की तर्ज पर सभी शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की जाए। 62 वर्ष में सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमानुसार ग्रेच्युटी का भुगतान हो तथा यूजीसी संस्तुतियों के अनुरूप सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए। NPS से OPS में आए शिक्षकों की राशि GPF में त्वरित रूप से अंतरित हो और सेवानिवृत्त शिक्षकों के पेंशन/GPF का शत-प्रतिशत भुगतान प्राथमिकता पर किया जाए।
सेवा व पदोन्नति सम्बंधी विसंगतियां: यूजीसी रेगुलेशन 2018 के तहत प्रत्येक पदोन्नति पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि दी जाए, प्रोफेसर पदनाम अर्हता तिथि से मिले तथा ‘समर्थ पोर्टल’ पर 110 API व 10 शोध पत्रों की अनुचित शर्त को संशोधित किया जाए। समर्थ पोर्टल पर आवेदनों का निस्तारण 15 दिनों के भीतर करने और गैर-पीएचडी शिक्षकों की पदोन्नति छूट को 31 दिसंबर 2024 तक विस्तारित करने की मांग की गई।पारदर्शी स्थानांतरण नीति: शिक्षकों के लिए एकल स्थानांतरण व्यवस्था लागू हो, न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 1 वर्ष की जाए तथा एनओसी (NOC) की जटिल बाध्यता समाप्त हो।अवकाश व चिकित्सकीय सुविधाएं: राज्य कर्मचारियों की भांति पूर्ववत चिकित्सकीय अवकाश का अधिकार बहाल हो तथा कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष्मान कार्ड सरेंडर का विकल्प व अन्य राज्यों के मूल निवासी शिक्षकों को भी पात्रता दी जाए। महाविद्यालयों में यूजीसी नियमानुसार 10 सप्ताह का ग्रीष्मावकाश लागू किया जाए।
परीक्षा प्रणाली एवं पारिश्रमिक सुधार: निरंतर परीक्षाओं के बोझ से मुक्ति हेतु NEP 2020 के तहत वर्ष में एक बार मुख्य परीक्षा आयोजित कराई जाए, वस्तुनिष्ठ पद्धति हटाई जाए और ए. आई. आधारित मूल्यांकन नीति वापस ली जाए। साथ ही परीक्षा पारिश्रमिक व TA/DA दरों में वृद्धि कर 15 दिनों में सीधा भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा कुल परीक्षा शुल्क का 25% अंश महाविद्यालयों को आंतरिक मूल्यांकन के मद में दिया जाए।
आमेलित व स्ववित्तपोषित शिक्षक: आमेलित प्रवक्ताओं को पूर्व संविदा सेवा जोड़ते हुए OPS का विकल्प दिया जाए, तथा सहायता प्राप्त कॉलेजों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेकर शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान प्रदान किया जाए।महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन निरंतर सौहार्दपूर्ण संवाद का पक्षधर रहा है, परंतु शासन एवं उच्च शिक्षा निदेशालय स्तर पर निरंतर उपेक्षा के चलते शिक्षक समुदाय में गहरा असंतोष है। यदि शासन द्वारा इन जायज मांगों का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।इस अवसर पर जिले के अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।










