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जनपद की हज़ारों सड़क सुरक्षा सखियों ने लिया वृहद वर्चुअल प्रशिक्षण; “शून्य दुर्घटना दिवस (ZAD)” अभियान में निभाएँगी अग्रणी भूमिका

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Asha Bharti News

 

जिला प्रशासन एवं आईआईटी मद्रास (CoERS) के संयुक्त प्रयासों से महिलाओं को बनाया जाएगा सामुदायिक सड़क सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी

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हर नारी बने सड़क सुरक्षा सखी–हर नारी की यही पुकार सुरक्षित रहे हर परिवार

सड़क दुर्घटनाओं को शून्य करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल, हजारों सड़क सुरक्षा सखियां हुईं तैयार

महिला शक्ति बनेगी सड़क सुरक्षा की प्रहरी, 8,000 से अधिक सड़क सुरक्षा सखियों का प्रशिक्षण

सुरक्षित यातायात के लिए नई पहल: देश में पहली बार सड़क सुरक्षा सखियों का वृहद प्रशिक्षण

सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने की पहल, हजारों महिलाओं को बनाया जा रहा ‘सड़क सुरक्षा सखी’

 

महेश चंद्र गुप्ता ब्यूरो चीफ 
अंबेडकर नगर 04 जुलाई 2026। जिलाधिकारी श्रीमती ईशा प्रिया के दिशा निर्देशन में जिला प्रशासन, अम्बेडकर नगर एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी (CoERS), आईआईटी मद्रास के संयुक्त प्रयासों से आज लगभग 08 हजार सड़क सुरक्षा सखियों (SSS) के लिए “हर नारी बने सड़क सुरक्षा सखी” विषय पर एक वृहद वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण 7 जुलाई से 21 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाले *”शून्य दुर्घटना दिवस (Zero Accident Day – ZAD)”* अभियान की पहली प्रमुख गतिविधि के रूप में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने कहा कि “शून्य दुर्घटना दिवस (ZAD)” जनभागीदारी पर आधारित एक महत्वपूर्ण अभियान है, जो 7 जुलाई से 21 जुलाई तक जनपद भर में संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सड़क सुरक्षा सखियाँ अग्रणी भूमिका निभाएँगी और घर-घर पहुँचकर सड़क सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुँचाएँगी। उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, चालकों एवं समाज के सभी वर्गों से अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ जब जनसहयोग जुड़ता है, तभी किसी अभियान को वास्तविक सफलता मिलती है।

इसके उपरांत प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम, हेड, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी (CoERS), आईआईटी मद्रास ने अपने संबोधन में बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में लगभग 90 प्रतिशत पुरुष होते हैं और इनमें अधिकांश युवा हैं। इसलिए युवाओं में सुरक्षित यातायात व्यवहार विकसित करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “शून्य दुर्घटना दिवस” किसी निश्चित अवधि तक सीमित अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन की सोच और जीवनशैली बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान पूरा देश एकजुट दिखाई दिया, उसी प्रकार सड़क सुरक्षा के लिए भी समाज के प्रत्येक वर्ग को एक साथ आगे आना होगा। सरकार सड़क सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन जब नागरिक भी सहयोग का हाथ बढ़ाएँगे, तभी प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित अपने घर लौट सकेगा।

इस अवसर पर पंकज मेहरा, प्रिंसिपल प्रोजेक्ट ऑफिसर, CoERS, आईआईटी मद्रास ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि महिलाएँ अपने परिवार और समुदाय में व्यवहार परिवर्तन की सबसे प्रभावी प्रेरक बन सकती हैं। उन्होंने सड़क सुरक्षा सखियों को समझाया कि वे किस प्रकार अपने घर, गाँव और समुदाय में सड़क सुरक्षा की रोल मॉडल बनकर बच्चों, युवाओं तथा परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विकेन्द्रीकृत स्वरूप में ग्राम पंचायत एवं नगर स्तर पर किया गया, जहाँ से हजारों महिलाओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान सड़क सुरक्षा सखियों को सड़क सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, प्रभावी संवाद, सामुदायिक जनजागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

आगामी 7 जुलाई से प्रारंभ होने वाले “शून्य दुर्घटना दिवस (ZAD) अभियान के दौरान यही प्रशिक्षित सड़क सुरक्षा सखियाँ जनपद भर में घर-घर पहुँचकर सड़क सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुँचाएँगी। जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा नागरिकों के सहयोग के माध्यम से अम्बेडकर नगर को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
*हेमेंद्र शर्मा, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी आईआईटी मद्रास ने बताया कि प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में पहली बार सड़क दुर्घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से हजारों महिलाओं को ‘सड़क सुरक्षा सखी’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन सखियों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने, नागरिकों को सुरक्षित यातायात के लिए प्रेरित करने तथा सड़क सुरक्षा संस्कृति को जन-आंदोलन का स्वरूप देने हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में देश में पहली बार 8,000 से अधिक सड़क सुरक्षा सखियों को एक साथ वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान कर एक नई पहल की गई है।

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