
उद्यान विभाग के मार्गदर्शन एवं 50 प्रतिशत शासकीय अनुदान से 2000 वर्ग मीटर में स्थापित किया आधुनिक पॉलीहाउस
11 हजार जरबेरा पौधों से सालाना 5.5 से 6 लाख फूल उत्पादन की संभावना, 6 से 7 लाख रुपये तक शुद्ध वार्षिक लाभ का अनुमान
ड्रिप सिंचाई ने बचाया पानी, वैज्ञानिक तकनीक ने खेती को बनाया अधिक लाभकारी
महेश चंद्र गुप्ता ब्यूरो चीफ
अंबेडकर नगर 15 सितंबर 2026।(आशा भारती नेटवर्क) परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और सीमित आमदनी की चिंता, आज आधुनिक एवं संरक्षित खेती के माध्यम से बेहतर आय की उम्मीद में बदल चुकी है। जनपद के विकास खण्ड भीटी के ग्राम मानिकपुर की कृषक श्रीमती किरन सिंह, पत्नी अखिलेश प्रताप सिंह ने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और उद्यान विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना का लाभ उठाकर खेती के क्षेत्र में नवाचार की मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आधुनिक हवादार पॉलीहाउस स्थापित कर जरबेरा की खेती को अपनाया और कृषि को लाभकारी व्यवसाय की दिशा में आगे बढ़ाया।
कृषक श्रीमती किरन ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में धान एवं गेहूं की परंपरागत खेती की जाती थी। सिंचाई, रोपाई और निराई-गुड़ाई में अधिक श्रम एवं लागत आने के कारण उत्पादन के सापेक्ष मुनाफा सीमित रहता था। रोग एवं कीट प्रकोप से फसल प्रभावित होने तथा उपज का अपेक्षित बाजार मूल्य न मिल पाने जैसी चुनौतियां भी खेती की लाभप्रदता को प्रभावित करती थीं।
ऐसे समय में खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़कर कुछ नया करने का निर्णय लिया। उद्यान विभाग के माध्यम से पॉलीहाउस खेती की जानकारी मिलने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि जरबेरा के फूलों की मांग शादी-विवाह, पार्टियों एवं गुलदस्तों में वर्षभर बनी रहती है। यही जानकारी उनके लिए खेती में बदलाव की नई शुरुआत बनी।
उद्यान विभाग का मार्गदर्शन बना सफलता का आधार
कृषक ने उद्यान विभाग के सहयोग से 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आधुनिक हवादार पॉलीहाउस का निर्माण कराया। इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं उन्नतशील पौधों की तकनीक को अपनाया। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पानी की लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक बचत होने के साथ खाद को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाने में सुविधा मिली।
पॉलीहाउस निर्माण एवं पौधों पर कुल 32 लाख रुपये से अधिक की लागत आई, जिसमें सरकार द्वारा 50 प्रतिशत शासकीय अनुदान प्रदान किया गया। इससे कृषक पर प्रारंभिक निवेश का आर्थिक बोझ कम हुआ और आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का मार्ग आसान हुआ।
11 हजार पौधों से फूलों की खेती में नई उम्मीद
कृषक ने पुणे की एक उन्नत नर्सरी से जरबेरा के 11,000 टिश्यू कल्चर पौधे मंगवाए। इन पौधों को पॉलीहाउस में तैयार उठी हुई क्यारियों पर ड्रिप सिंचाई व्यवस्था के साथ रोपित किया गया। रोपण के लगभग तीन माह बाद ही जरबेरा के पौधों में फूल खिलने लगे।
जरबेरा की विशेषता यह है कि एक बार पौधा लगाने के बाद लगभग 3 से 4 वर्ष तक लगातार उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। प्रत्येक पौधे से वर्ष में औसतन 45 से 50 प्रीमियम गुणवत्ता के फूल प्राप्त होने की संभावना है। इस प्रकार 11 हजार पौधों से सालाना लगभग 5.5 से 6 लाख फूल प्राप्त होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उत्पादित जरबेरा के फूलों को स्थानीय बाजारों के साथ लखनऊ की गोमती नगर किसान मंडी, दिल्ली की गाजीपुर मंडी में विक्रय किया जा रहा है।
फूलों की खेती बनी आर्थिक समृद्धि का माध्यम
पॉलीहाउस में आधुनिक तकनीक के उपयोग से उत्पादन की बेहतर संभावनाओं के साथ कृषक की आय में वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। स्ट्रक्चर, मजदूरी, खाद, बिजली आदि खर्चों को निकालने के बाद 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के पॉलीहाउस से प्रतिवर्ष लगभग 6 से 7 लाख रुपये शुद्ध लाभ होने की संभावना है।
यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान सही फसल का चयन, वैज्ञानिक तकनीक, सटीक प्रबंधन और शासकीय योजनाओं का समुचित लाभ उठाए तो सीमित भूमि में भी कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
“तकनीक और सही प्रबंधन से खेती को बनाया जा सकता है लाभकारी व्यवसाय”
कृषक श्रीमती किरन सिंह ने कहा कि उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में पॉलीहाउस के साथ ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाकर कम भूमि में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उनका मानना हैकि आधुनिक तकनीक, सटीक प्रबंधन एवं सिंचाई व्यवस्था को अपनाकर खेती की लागत को नियंत्रित करते हुए मुनाफे की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने जनपद के अन्य किसानों को संदेश देते हुए कहा कि किसान उद्यान विभाग से संपर्क कर उन्नत किस्म की खेती तथा नवीन तकनीकी सिंचाई व्यवस्था को अपनाएं। आधुनिक कृषि पद्धतियों एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकते हैं।
श्रीमती किरण सिंह की यह सफलता केवल एक किसान की उपलब्धि नहीं, बल्कि पारंपरिक खेती से आधुनिक एवं तकनीक आधारित कृषि की ओर बढ़ते अम्बेडकरनगर के किसानों के लिए प्रेरणा की कहानी है। उद्यान विभाग के सहयोग, शासकीय अनुदान और नवीन तकनीक के समन्वय से कृषि में नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं और किसान आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।


परंपरागत खेती से आधुनिक कृषि








