लखनऊः देश में इस वक्त दो धार्मिक स्थलों की बड़ी चर्चा हो रही है और यह चर्चा किसी भव्यता या किसी विकास कार्य की नहीं बल्कि दान चोरी की है. इन दोनों ही स्थलों पर काम करने वालों ने ऐसी हेराफेरी की है कि मामला जांच का विषय बन गया है।
एक के केस में तो गिरफ्तारियां भी हो गईं और दूसरे वाले के केस में अभी पहली एफआईआर दर्ज हुई है और जांच का काम जारी है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित प्रभु श्री राम के मंदिर की और उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम की. दोनों ही धार्मिक स्थलों का अपना महत्व है, जिसके कारण यहां लोग भारी संख्या में दर्शन करने आते हैं और दान करते हैं. हालांकि दोनों जगहों की हेराफेरी में अंतर है. आइए जानते हैं आखिर कैसे दोनों मामले अलग हैं.
राम मंदिर दान चोरी
सबसे पहले बात करते हैं राम मंदिर दान चोरी की. राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से श्रद्धालुओं के आवागमन का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ की कभी रुका ही नहीं. उल्टा मंदिर प्रशासन को लोगों से न आने की अपील करनी पड़ती थी. प्रभ श्री राम की भक्ति करोड़ों हिंदुओं के दिल में ऐसा उमड़ा की मंदिर का खजाना दान से भर गया. कोई सोना-चांदी दान किया तो कोई लाखों रुपये दान किए. वहीं रोजाना आने वाले लाखों श्रद्धालु भी अपनी-अपनी श्रद्धा से दान करते गए. बताया जाता है कि जब से रामलला का दर्शन होना शुरू हुआ तब से लेकर अब तक 3200 करोड़ से अधिक रुपये के दान आए. लेकिन इसपर बुरी नजर पड़ गई, उन दानपात्रों के पैसे गिनने वाले कर्मचारियों की. जिन्होंने अपने मोजे और जेब तक में पैसे भरकर घर ले गए. अभी तक इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप दी. आरोपियों की संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है. साथ ही पूछताछ भी जारी है।










