Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता शिविर

Author Image
Written by
Asha Bharti News

(आशा भारती नेटवर्क)
अंबेडकर नगर। उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषितए प्लान ऑफ एक्शन 2026-27 के अनुपालन में चन्द्रोदय कुमार, जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के निर्देशानुसार आज दिनांक 30 जुलाई को राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या, में किशोर न्याय विषय पर श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या एवं राजकीय महिला शरणालय अयोध्या का निरीक्षण किया गया।

Advertisement Box

इस विधिक साक्षरता शिविर एवं निरीक्षण में श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, जि०वि० से०प्रा० अम्बेडकरनगर के कर्मचारी तथा बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या से केयर टेकर अन्य स्टाफ एवं बाल अपचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर द्वारा बताया गया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015. भारत में बच्चों के लिए एक कानून है. जिसका मुख्य उद्देश्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों (जो कानून तोड़ते हैं या जिन्हें देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है) की देखभाल, सुरक्षा, पुनर्वास और विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति जैसे तंत्र स्थापित किए गए हैं, और जघन्य अपराधों में कुछ 16-18 साल के किशोरों पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने का प्रावधान भी है, जो बाल-मित्रवत प्रक्रिया और पुनर्वास पर जोर देता है। अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया को बाल-मैत्रीपूर्ण बनाना एवं कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों (विधि से संघर्षरत किशोर) और देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों (अनाथ, परित्यक्त) की देखभाल करना तथा शिक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों को समाज में फिर से एकीकृत करना है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के सभी व्यक्तियों को बच्चा माना जाता है। कानून तोड़ने वाले बच्चों के मामलों को देखने के लिए, किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया गया है तथा ऐसे बच्चे जिन्हे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है उनके लिये बाल कल्याण समिति की स्थापना की गई है। यह अधिनियम 2000 के पुराने किशोर न्याय अधिनियम की जगह लेता है और 2015 में पारित हुआ। निर्भया मामले के बाद इस अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई और 2015 में यह संसद द्वारा पारित किया गया। यह अधिनियम बच्चों को एक विशेष कानूनी दर्जा देता है और आपराधिक न्याय प्रणाली के बजाय उनके पुनर्वास और सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है, साथ ही कठोर अपराधों में वयस्कों जैसी सजा का प्रावधान भी करता है।

श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या परिसर की स्वच्छता, किशोर अपचारियों के खाने पीने एवं उनके स्वास्थय के सम्बन्ध में शिक्षा तथा मनोरंजन के साधनों पर जानकारी ली गई। बाल अपचारियों को किसी प्रकार की अस्वस्थता होने पर अविलम्ब चिकित्सा सुविधा दिलवाये जाने हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये एवं किशोर अपचारियों से उनकी समस्या सुनी गई एवं पूछा गया कि क्या सभी अपचारियों के पास अधिवक्ता है अथवा नहीं उनके मुकदमों की पैरवी ठीक से हो रही है अथवा नहीं एवं यदि किसी अपचारी के पास अधिवक्ता नहीं है अथवा कोई समस्या है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रार्थना पत्र देकर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर अपनी पैरवी करवा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त श्रीमती नीलम वर्मा, सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर द्वारा राजकीय महिला शरणालय, अयोध्या निरीक्षण के दौरान महिला संवासिनियों से वार्ता कर उनके स्वास्थ्य, मिलने वाले भोजन, एवं अन्य किसी प्रकार की समस्या के विषय में जानकारी प्राप्त की गई तथा प्रभारी अधीक्षिका को परिसर की स्वच्छता, परिसर में निवासरत शिशुओं की देखरेख हेतु उचित दिशा निर्देश दिये गये।

(नीलम वर्मा)
सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर।

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

Advertisement Box

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

आज का सुविचार

क्रोध और तूफान दोनों एक समान हैं। शांत होने के बाद ही पता चलता है कि कितना नुकसान हुआ है। इसलिए हमेशा शांत रहकर निर्णय लें, क्योंकि गर्म दिमाग से लिए गए फैसले अक्सर गलत होते हैं।

Advertisement Box

और भी पढ़ें

[news_reels]
WhatsApp