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जिलाधिकारी के आदेश का पालन नहीं करती जांच समिति, जांच हेतु निर्धारित समय सीमा समाप्त

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Written by
Asha Bharti News

 

तीन माह बाद भी जांच ठंडे बस्ते में,कागजों तक सिमटी कार्रवाई।

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(आशा भारती नेटवर्क)
जलालपुर अंबेडकर नगर। जिले के विकासखंड जलालपुर अन्तर्गत कजपुरा ग्रामपंचायत में हुये विकास कार्य, वृक्षारोपण, इण्टरलाकिंग, नाली,व स्ट्रीट लाइट तथा नल रिबोर व मरम्मत में तो माह में दो-दो बार कराने में रिकार्ड है जिसमें हुये वित्तीय अनियमितता व फर्जी बिल बाउचर से भुगतान कराकर ग्राम प्रधान अफसाना बानो,ग्राम सचिव दिवाकर वर्मा,राज्य वित्त कन्सलटेन्ट इंजीनियर सबी जहरा आपस में मिल बांट कर सरकारी धन को निजी कार्य में किया जा रहा प्रयोग जिसके सम्बन्ध में समाजसेवी आर.टी.आई एक्टिविस्ट भाजपा मण्डल महामंत्री सत्यम श्रीवास्तव ने साक्ष्य सहित शपथपत्र के साथ शिकायत जिलाधिकारी को 16 जनवरी 2026 को ही प्रेषित किया जिसमें कोई कार्यवाही व जांच न होता देख जनसूचना के माध्यम से जानकारी चाही तो जबाब में आया कि जांच हेतु मूल प्रार्थनापत्र सीडीओ को भेजा जा चुका है और आख्या अप्राप्त है तथा दूसरी तरफ एक आईजीआरएस शिकायत पर जो आख्या अपलोड हूई उसमें जिलाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र जिसमें जांच समिति में सहायक निदेशक मत्स्य विभाग व अमितेष प्रसाद अवर अभियंता नि.खं. लोक निर्माण विभाग को रखा गया है पर जिला प्रशासन द्वारा विकास कार्यों में अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति अब सवालों के घेरे में है। विकासखंड जलालपुर के ग्राम पंचायत कंजपुरा में कराए गए कार्यों की जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि 16 जनवरी 2026 को दी गई शिकायत में इंटरलॉकिंग, नाली, खड़ंजा समेत विभिन्न निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर 13 बिंदुओं पर जांच के लिए समिति गठित की गई थी, जिसमें तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।
हालांकि, हकीकत यह है कि जांच टीम का गठन केवल कागजों तक ही सीमित रह गया। न तो मौके पर जांच की कोई ठोस जानकारी सामने आई और न ही निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इससे शिकायतकर्ता और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच होती, तो दोषियों पर कार्रवाई संभव थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब खुद जिलाधिकारी ने 15 दिनों में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था, तो आखिर तीन महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा तथा यह भी संदेह है कि एक तरफ जांच अधिकारी सीडीओ को तथा दूसरी तरफ जांच समिति तो सवाल यह है जांच और कार्रवाई पूर्ण कौन करेगा शिकायत कर्ता और
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न होकर विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जनता का भरोसा कायम रहे।

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