उत्तर प्रदेश। (आशा भारती नेटवर्क) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में वकीलों की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने खुद संज्ञान लेते हुए इस मामले की व्यापक जांच के आदेश दे दिए हैं।
पुलिस महानिदेशक, अभियोजन निदेशालय और यूपी बार कौंसिल की रिपोर्टों से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश में कुल 5,14,439 सक्रिय पंजीकृत वकीलों में से 4,157 के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 418 वकील ऐसे हैं जिन पर तीन या उससे ज्यादा केस चल रहे हैं, जबकि 28 वकीलों के खिलाफ 11 से ज्यादा एफआइआर दर्ज हैं। हद तो तब हो गई जब एक वकील के खिलाफ अकेले 46 प्राथमिकियां मिलीं। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा राजधानी लखनऊ से आया है। यहां 905 वकीलों पर 575 आपराधिक मामले दर्ज हैं, और इनमें भी अकेले वजीरगंज थाने में 422 वकीलों के खिलाफ 236 केस दर्ज पाए गए। कोर्ट ने बार कौंसिल आफ यूपी के सचिव को निर्देश दिया है कि 105 फर्जी डिग्रीधारक वकीलों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआइआर तुरंत दर्ज कराई जाए। अदालत ने प्रशासन से कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की है, जिसके लिए अगली सुनवाई की तारीख 20 अगस्त तय की गई है।










